Monday, June 22, 2009

माया जाल भस्म

माया का मायावी तिलिस्म भस्म होगा !!

आशुतोष कुमार सिंह
उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती भारत में दलित सशक्तीकरण की प्रतीक हैं. ‘बहन जी’ के नाम से जानी जाने वाली मायावती इससे पहले तीन बार अल्पावधि के लिए मुख्यमंत्री बनीं और 2007 में उन्होंने पूर्ण बहुमत के साथ पद संभाला. पंद्रह जनवरी 1956 को दिल्ली के एक दलित परिवार में जन्मी मायावती युवा अवस्था में ही दलित नेता कांशीराम से प्रभावित होकर राजनीति में आईं. वर्ष 1984 में बसपा की स्थापना के समय वे कांशीराम के साथ थीं. वे पहली बार 1984 में मुज़फ़्फ़रनगर के कैराना से और फिर 1989 में हरिद्वार से चुनाव लड़ीं, पर दोनों बार हार गईं. वर्ष 1989 ही में वे बिजनौर लोकसभा सीट से संसद में पहुँचीं. वर्ष 1995 में वे उत्तर प्रदेश की पहली दलित महिला मुख्यमंत्री बनीं. जातीय समीकरण में बदलाव लाकर मायावती ने सफलतापूर्वक दलित-सवर्ण गठजोड़ पेश किया है.प्रधानमंत्री का सपना देख रही मायवती को इस बार के 15वीं लोकसभा चुनाव से निराशा हाथ लगी.उनका समीकरण गड़बड़ा गया. उधर मीरा कुमार को राष्ट्रपति बनाकर कांग्रेस ने माया के दलित राजनीति में जबरदस्त तरीके से सेंध लगा दिया हैं. ऐसे में माया का मायावी तिलिस्म का भस्म होना लगभग तय माना जा रहा है. लालू की लाल बत्ति गूल हो ही गई है, रामविलास के झोपड़ी में आग भी लग चुका है. ऐसे में सोनिया शरणम् गच्छामि के अलावा इन समीकरण वाले नेताओं के पास कोई चारा नहीं है.
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