आज मै आप लोगो को अपने बारे में कुछ बताने जा रहा हूं. वैसे तो खुद को समझना बहुत आसान काम नही होता है. फिर भी खुद को जितना समझ पाया हूं उसका कुछ अंश आप सब को बताना चाहता हूं. इससे पहले कि मै अपने बारे में कुछ विशेष बताउ, उससे पहले मै अपना परिचय बता दूं .
मेरा नाम आशुतोष कुमार सिंह है. मेरे पिता जी का नाम श्री वैधनाथ सिंह हैं. मां का नाम जासमति देवी है. हम तीन भाई और एर बहन हैं. बड़े भैया का नाम चन्द्रशेखर सिंह,बीच वाले का नाम राजबहादुर सिंह और सबसे छोटा मै खुद हूं. हमारा घर सीवान जिला के रजनपुरा गांव में है.थाना एम.एच.नगर है. मेरी प्रारंभिक पढाई गांव के ही एक मनटेसरी स्कूल से शुरु हुई,लेकिन मै वहां महज 15 दिन पढ़ा. उसके बाद अपना दीदी-जीजा के साथ नागालैंड चला गया. वहां पर भी पढाई घर पर ही हुई. वहां से आने के बाद सीधे मेरा दाखिला क्लास तीन में कराया गया. गांव के पास ही एक गांव है मधवापुर वहां पर सरस्वती शिशु सदन नाम से एक प्राइवेट स्कूल गत् कई सालों से चलाया जा रहा है. इसमें मै लगभग 10 माह पढा. उसके बाद इसी कक्षा में चैनपुर के शुसीला देवी कंवेट में नाम लिखवाया गाया जहां पर मै 2 साल तक पढा. यह स्कूल बीच में ही बंद हो गया. इसके बाद चैनपुर में ही लाला लाजपत राय प्राइवेट स्कूल में सातवी तक पढा. इसके बाद चैनपुर हाई स्कूल से मैट्रिक तक की पढाई पुरा किया. मैट्रिक में सेकेंड डीविजन से पास होने के कारण पुरे क्षेत्र में बहुत ही किरकिरी हुई. सेकेंड डीविजन आने से सभी लोग बहुत हैरान थे. कारण मै जानता था. मुझे अचरज हुआ था कि आखिर मै पास कैसे हो गया? क्योंकि मै पढ्ना परीक्षा के पांच महिने पहले से ही छोड़ चुका था. इसके पीछे की कहानी कुछ और है जिसको मै बाद में बताउंगा. जब मै पास हो ही गया था तब मैने सोंचा कि क्यों न मै आगे कि पढाई गांव से दूर किसी दूसरे राज्य में जाकर करू.इस कड़ी में मै बनारस गया, वहां पर 12वीं में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा की तारीख निकल चूकी थी. फिर इलाहाबाद गया वहां पर कई कॉलेजों में दाखिले के लिये प्रवेश परीक्षा में बैठा. इसी बीच लखनऊ आ गया, यहां पर भी बीएसएनवी इंटर कॉलेज में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा में बैठा. इलाहाबाद में भी में पास हो गया और लखनऊ में भी. चूंकि लखनऊ में मेरे रिस्तेदार रहते थे इसलिए मैने लखनऊ में ही अपना नाम लिखवा लिया. दो साल तक लखनऊ में पढा. इसके बाद दिल्ली आ गया. लखनऊ से दिल्ली तक का सफर भी कम रोचक नहीं है. इसको अगले पोस्ट में बताउंगा. फिलहाल इतना ही. आप मुझे मेरे मो.न.91-9891798609 पर संपर्क कर सकते हैं. आपलोगो का आशुतोष
कब तक बने रहेंगे दरिद्र नारायण !!
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आशुतोष कुमार सिंह
‘मनुष्य जाति ईश्वर को-जो वैसे नामहीन है और मनुष्य की वृद्धि की पहुंच के परे
हैं.जिन पर अनन्त नामों से पहचानती है, उनमें से एक नाम दरिद्र ...
16 years ago

1 comment:
aashutosh bhai aage batayie.
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