गरीबी की जय हो !स्लमडॉग मिलेनियर की जयकार हो रही है . रहमान के जय हो की जय हो रही है . भारत की गरीबी अब ग्लोबल हो रही है . हम इस पर इतरा रहे हैं . मिठाइयाँ बंट रही है . धमाकों की गूँज से दिल दहल रहा है . फिल्म की टिकट टैक्स फ्री हो रहे है . प्रणब दा कर में कटौती कर जय हो कह रहे हैं . आप और हम ताली बजा रहे हैं . मै भी क्या करु ! खुश हूं ! हमारे गरीबों को
उनकी बेबसी पर ग्लोबल मुहर जो लग गइ . इतना ही नही हमारे संसद पुत्रो ने जमकर मेजों को थपथपाया . खैर मनाईए की खुशी में कुर्सियां नही चलीं . मुस्कुराने का एक और वजह है . हमारे महान नेताओं को गरीबी के रुप में एक इंटरनेशनल ब्रांड जो मिल गया है .
कब तक बने रहेंगे दरिद्र नारायण !!
-
आशुतोष कुमार सिंह
‘मनुष्य जाति ईश्वर को-जो वैसे नामहीन है और मनुष्य की वृद्धि की पहुंच के परे
हैं.जिन पर अनन्त नामों से पहचानती है, उनमें से एक नाम दरिद्र ...
16 years ago

No comments:
Post a Comment