Wednesday, April 1, 2009

खरी खोटी

लालू की चाय की जय हो !

चाय की चुस्की की बात ही निराली होती है . वह भी मुफ्त में मिले तो . वैसे तो मुफ्त के हर माल पर संतुष्टी मिलती है . इस दुनिया में मुफ्तखोरों की कमी नही है . मै भी खुद को उनसे अलग नही समझता . 6 फरवरी को 09 को पटना से नई दिल्ली सम्पूर्ण क्रांन्ति रेलगाडी से आना हुआ . चाय की चुस्की लेने और चुगलखोरों की हजामत बनाने में मुझे खुद पर गर्व रहा है . लालू की टेन में 4 रुपये कप चाय लेकर मै धन्य हो गया . चाय में चायपत्ती कम , चीनी ज्यादा , पानी निडरतापूर्वक और दूध नदारद था . स्वाद लाजवाब ! पहली घूंट में ओठ जलने से बचा , दूसरी घूंट में तालू को जलने से नही बचा सका . जलने के बाद इस बेचाय को बेमन से घटक गया . आधे घंटे बाद चुस्की लेने का एक और मौका हाथ लगा . चाय विक्रेता से मैने पूछ लिया कि कितना बचा लेते हो . वह बोला 50 पैसे प्रति कप और 200 कप रोज बेच देता हूं .चाय या चाय का कप ! मै पुछ बैठा . विनम्र भाव से वह बोला बात बराबर है . आप कहो तो जूठे कप में और चाय मुफ्त में दे दूँ . नए कप में लेंगे तो 4 रुपये देने पडेंगे . मुफ्त चाय के नाम पर मै झूम उठा . जैसे ही वह बताया कि मुफ्त चाय की भरपाई वह गर्म जल से कर लेगा . मै ठंढा पर गया .चाय की चुस्की लिए बिना उसको मैने बिदा कर दिया .लालू की चाय की जय हो ! कह कर मै सो गया .

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