तो आइए हम सब नही सुधरने का संकल्प लें ! !
"मीडिया की छवि बिगाड़ने वाली घटिया पत्रकारिता के खिलाफ ईमानदार और पेशे का आदर करने वाले पत्रकारों का भी आंदोलित और संगठित होना आवश्यक बन गया है.'यह बात आज मैं नही कह रहा हू , बल्की एक प्रतिष्ठित अखबार की संपादिका कह रही हैं. जी हां आप सही सोच रहे हैं मै मृणाल पांडे द्वारा रविवार ,29 मार्च को लिखे गए संपादकीय 'बदलती अखबारी दुनिया और पत्रकारिता की चुनौतियां' की ही बात कर रहा हूं . बात की पृष्टभूमि में चाहे जो भी बात रही हो ,पर बात ,पते की तो है ही .हालांकि मीडिया जगत में इस संपादकीय पर यह भी कहा जा रहा है कि हिदुस्तान द्वारा यह संपादकीय शैलबाला जी और प्रमोद जोशी प्रकरण के आलोक में आया है.. अगर यह बात सही भी है तो भी मृणाल जी द्वारा पत्रकारिता को बचाने की दिशा में आगे आना ,सराहनीय व अनुकरणीय है.. बुरे पत्रकारों के खिलाफ संगठित होना शायद अब और प्रासंगिक हो गया है. आपसब को याद होगा कि मैने कुछ दिनों पहले 'अब मीडिया में क्रांति होगी !'शीर्षक से एक आलेख मीडिया खबर . काम के लिए लिखा था, जिसमें मैने इस बात का उल्लेख किया था कि गर पत्रकारिता का दशा -दिशा नही सुधरी तो कथित पत्रकारों का बहिष्कार किया जाना जरुरी हो गया है. पत्रकारिता को पतित करने वाले किसी भी कार्य को बरदास्त करना भी उतना ही अनैतिक है जितना पत्रकारिता को बदनाम करना.यह कितना दुखद आश्चर्य है कि जिस पत्रकारिता के जिम्में सामाज को मार्गदर्शीत करने की जिम्मेदारियां हैं वह लगभग सुरा-सुन्दरी में फंस चुका हैं. जो इससे अछुते हैं उनको पत्रकारों की श्रेणी में कम से कम आज कल तो नहीं ही रखा जा रहा है. धन्य है ऐसे पत्रकार और धन्य है ऐसी पत्रकारिता . क्या करेंगे इस पत्रकारिता का जिसमें पतन तो है ,त्राहीमाम तो है, कायरता तो है,रिपुता तो है और ताड़ना भी . पर जो होना चाहिए वह नहीं हैं . अब बिरजुआ की माई की ब्यथा खबर नहीं हैं, मनसुखिया दीदी की बेइज्जती खबर नहीं है, रामखेलावन चाचा के बैल की मौत खबर नहीं हैं, हीरामन चाची के गुमशुदा करेजा के टुकड़ा के लिए दो वाक्य की जगह नहीं हैं, जगह है तो वरुण के लिए है, राज ठाकरे के लिए है, अनंत सिंह के घोरे की मौत के लिए है, बंदर -भालुओं के लिए है... वाह ! लोकतंत्र का सदुपयोग कितना बहादुरी से हम कर रहे हैं ,इसके बारे में हमें नहीं लगता की कुछ कहने की जरुरत है.
गर जरुरत किसी बात की है वह है पत्रकारिता और इसके कथित पत्रकारों का शुद्धीकरण संस्कार करने का ..तो फिर सोच क्या रहे हैं ....आइए हम सब नही सुधरने का इस नवरात्र के पावन बेला में संकल्प लें ! !
आशुतोष कुमार सिंह
लेखक मीडिया स्कैन के संपादक मंडल के सदस्य हैं
91-9891798609

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