परदेश से आया एक स्वदेशीब्रिटेन से किशन त्यागी आये है। नई दिल्ली से चुनाव लड़ने। इनका मानना है कि यहां के नेता नकारा हो गए हैं। लोगों को बेवकुफ बना रहे हैं। जनता के दुख दर्द से इनको कुछ भी लेना देना नहीं हैं। एक दिन पहले कही गई बात दूसरे दिन भूल जाते हैं। त्यागी जी का मानना है कि यहां की संसदीय प्रणाली पुरी तरह से चरमरा गई है। इसलिए अब जरुरी हो गया है कि यहां पर वर्तमान परिस्थितियों के आधार पर एक नई संविधान सभा का गठन किया जाए । इनका सुझाव है कि यहां पर राष्ट्रपतीय शासन प्रणाली अपनाई जाये तो बहुत हद तक समस्या का समाधान संभव है। मूलत मेरठ के रहने वाले मिस्टर त्यागी बीबीसी के साथ १० सालों तक काम कर चुके है। भारत में १० वर्षों तक आइइएस के रुप में भी अपनी सेवायें दे चुके हैं। अन्ना हजारे के त्याग-गाथा से ये प्रभावित हैं। यहा के चुनाव में उम्मीदवारों द्वारा किए जा रहे धन बल के प्रयोग से ये महाशय व्यथित है। इंगलैंड का हवाला देते हुए ये कहते हैं कि वहां पर चुनाव में इतने खर्चे नहीं होते हैं। वहां पर लोग लोगों की बात सुनते हैं, वहां के हाइड पार्क में जो भी चाहे जाकर अपनी बात जोर जोर से चिल्लाकर रख सकता है। कुछ देर में सुनने वाले भी मिल जायेंगे । लेकिन यहां पर ऐसा नहीं है।
1 comment:
अध्यात्म में आपकी रूचि है, यह जानकर प्रसन्न्ता हुई। कदम ऊठे तो मंजिल मिलनी निश्चित है।
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