Monday, April 13, 2009

मेरी कविताएं-1

अविषयक

आशुतोष कुमार सिंह

कविता लिखनी है आज रात
सोच,छोड़ ,बैठा हूं सारे काज
सूझता नही विषय कोई
लिख रहा हूं अविषयक कविता

समझाता हूं मन को
ऐसी कविताओं से क्या है लाभ
ब्याकूल मन समझाता मुझे
बता तेरी सरकार कितनी विषयों पर काम कर रहीं है
बता तेरे संसद में कितनी विषयगत बहसें होती हैं
बता तेरे न्यायालय में कितनो को विषययोग्य डंड मिलता है
बता तेरे विधायक कितने विधेयक पास करवाते है
बता तेरे मुखिया जी कितने विषयज्ञानी शिक्षकों को बहाल करते है
बता तेरे परिवार वाले तुझसे कार्यविषयक कितनी चर्चाएं करते है
बता तू, अपने नागरिक विषय को कितना जानता है
जब सभी विषयहिन हो गए है
तो तू विषयहिन कविता क्यों नहीं लिख सकता !

1 comment:

प्रिया said...

Kavita vishayheen nahi hain..... sach poochiyein . to na jane kitne vishay samete hue hain apne ander...aapne jo kahna chaha.... seedhe .pahuch gaya