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Saturday, May 14, 2016
राहुल मलहोत्राः फिजिक्स से फाइनेंस तक
Saturday, November 28, 2009
कब तक बने रहेंगे दरिद्र नारायण !!
‘मनुष्य जाति ईश्वर को-जो वैसे नामहीन है और मनुष्य की वृद्धि की पहुंच के परे हैं.जिन पर अनन्त नामों से पहचानती है, उनमें से एक नाम दरिद्र नारायण है, उसका अर्थ है गरीबों का या गरीबों के हृदय में प्रकट होने वाला ईश्वर.’
यह बात गांधी ने 1929 ई.में कहा थी. गांधी ने जिन गरीबों की व्यथा को अपने जमाने में महसूस किया था, वह व्यथा आज भी और विकराल रूप में विद्यमान है. महात्मा गांधी ने कहा था कि ‘गरीबों के लिए रोटी ही अध्यात्म है. भूख से पीड़ित उन लाखों करोड़ों लोगों पर किसी और चीज का प्रभाव पड़ ही नहीं सकता. कोई दूसरी बात उनके हृदय को छू ही नहीं सकती. लेकिन उनके पास आप रोटी लेकर जाइये और वे आपको ही भगवान की तरह पूजेंगे. रोटी के सिवा उन्हें और कुछ सूझ ही नहीं सकता.
11 मार्च 1939 को हरिजन में लिखे एक लेख में गांधी कहते हैं कि ‘‘मेरी उनके पास (गरीबों के पास) ईश्वर का संदेश ले जाने की हिम्मत नहीं होती. उनके पास ईश्वर का संदेश ले जाना हो, तो यह काम में उनके पास पवित्र परिश्रम का संदेश ले जाकर ही कर सकता हूँ.’’ वर्तमान में भारत में गरीबी की बात करें तो यहां पर अन्य क्षेत्रों की तूलना में गरीबी में गिरावट का दर बहुत ही धीमी है. हाल ही में प्रकाशित विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2015 तक भारत की एक चैथाई जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने के लिए अभिशप्त होगी. उसे जीविका चलाने के लिए प्रतिदिन 1.25 डॉलर (करीब 62 रूपए) से भी कम राशि मिल पायेगी.
‘ग्लोबल इकोनामिक प्रॉस्पेक्टस फॉर 2009’ नामक इस रिपोर्ट के अनुसार गरीबी रेखा से नीचे जीवन जीने वालों की संख्या के मामले में हमारा हिन्दुस्तान इस समय सिर्फ सहारा से जुड़े कुछ अफ्रीकी देशों से ही आगे है. 1990 में जहां भारत की स्थिति चीन से अच्छी थी वही आज खराब हो गई. वर्ष 1990 में जहां चीन की कुल अबादी के 60.2 फीसद जनसंख्या गरीब थी वहीं वर्ष 2005 आते-आते इनकी संख्या 15.9 फीसद रह गई. कहने का मतलब यह है कि चीन जो कि विश्व का सबसे बड़ा आबादी वाला देश है, ने महज 15 वर्षों के नियोजन में अपने यहां 44.3 फीसद गरीबी को कम किया है (जनसंख्या के अनुपात में). 2015 तक यह अनुमान लगाया जा रहा है कि चीन में गरीबों की संख्या कुल आबादी का महज़ 6.18 फीसद रह जायेगी.
1990 में भारत में जहां 51.3 फीसद गरीब आबादी थी. 15 साल बाद महज़ 9.7 फीसद की गिरावट दर्ज की गई और गरीबों का सरकारी आंकड़ा 41.6 फीसद पर ही अटक गया. 2015 तक भी इस आंकड़े 16.6 फीसद की ही गिरावट होने की संभावना व्यक्त की जा रही है.
सरकारी आंकड़ों के हिसाब से 2015 तक 62 रूपए से कम आय वालों की संख्या कुल आबादी का 25 फीसद रहेगा. उस समय तक महंगाई दर कहां तक पहुंचेगी और 100 रूपए रोज कमाने वाले भी क्या दाल-रोटी खा पायेंगे? इस बात से इन सरकारी आकड़ों को कुछ लेना-देना नहीं है.
जरा सोचिए गर 100 रूपए से कम आय प्राप्त करने वालों को गरीब श्रेणी में रख दिया जाए (वास्तव में हैं भी) तब इसी खुशबूनुमा सरकारी आकड़ों से कितनी खुशबू आयेगी!!
1990 से हमने आधुनिकीकरण और वैश्वीकरण के वशीभूतिकरण में जो कुछ भी किया उसका खामियजा देश की आम जनता भुगत रही है. अवसाद और आक्रोष से भरी जनता कहीं आत्महत्याएं कर रही है तो कहीं हत्या करने पर आमदा है. इस विकराल दरिद्र नारायण का पेट कैसे भरेगा, यह यक्ष प्रश्न आज भी उसी तरह विद्यमान है जिस तरह महात्मा गांधी के जमाने में था.
मंगल-प्रभात के पेज 29-30 में एम.के.गांधी लिखते हैं कि ‘‘रोज की जरूरत जितना ही, रोज पैदा करने का नियम हम नहीं जानते, या जानते हुए भी उसे पालते नहीं. इसलिए जगत में असमानता और उसमें पैदा होने वाले दुख हम भुगतते हैं. अमीर के यहां उसको न चाहिए वैसी चीजें भरी पड़ी होती है, वे लापरवाही से खो जाती है, बिगड़ जाती है, जब कि इन्हीं चीजों की कमी के कारण करोड़ों लोग भटकते हैं, भूखों मरते हैं, ठंड से ठिठुरते हैं. सब अगर अपनी जरूरत की चीजों का ही संग्रह करें, तो किसी को ‘तंगी’ महसूस न हो और सबको संतोष हो. करोड़पति अरबपति होना चाहता है, फिर भी उसको संतोष नहीं होता. कंगाल करोड़पति होना चाहता है, कंगाल को भरपेट ही मिलने से संतोष होता हो ऐसा नहीं देखा जाता. फिर भी उसे भरपेट पाने का हक है, और उसे उतना पाने वाला बनाना समाज का कर्ज है. इसलिए उसके (गरीब के) और अपने संतोष के लिए अमीर को पहल करनी चाहिये. अगर वह अपना बहुत ज्यादा परिग्रह छोड़े, तो कंगाल को अपनी जरूरत का आसानी से मिल जाय और दोनों पक्ष संतोष का सबक सीखें.
गांधी ने तो अमीरों को गरीबों के प्रति उनका फर्ज बता दिया. पर हमारे अमीर इस पर कितना अमल कर रहे हैं इसका अंदाजा स्वीस बैंक में जमा इनके काले धनों से ही लगाया जा सकता है. मधुकोड़ा जैसे भ्रष्टाचारी भी इस पावन देश में जन्म लेंगे शायद इसकी परिकल्पना गांधी नहीं कर पाए थे.
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(लेखक द संडे इंडियन से जूड़े़ हुए हैं)
Sunday, November 15, 2009
आशुतोष कुमार सिंह
राज भाई रउआ के हमार नमन। रउआ हिंदी के विरोध क के आपन हिंदुस्तानी होखे के पुरा परिचय दे देले बानी। हिंदी में अबू आजमी के शपथ लेवे से रोक के आपन मराठी प्रेम के डंका पीटवा देले बानी। राउर एह कारनामा से हिंदी के लोगन में हिंदी के लेके राष्ट्रवाद हिलोर मारे लागल बा. बाकिर राउर मराठी प्रेम रउआ के केतना महान बनावत बा कबो सोचले बानी!! शायद ना सोचले होखब. रउआ के एगो चोर के कहानी सुनावत बानी. एगो चोर रहे. खुब लूट मचवले रहे. एक दिन ओकरा एगो साधू से भेंट हो गइल. साधू ओकरा से पुछलस अरे भाई तू आपन जान प खेल के ई सब धन केकरा खातिर बटोरत बाड़? ऊ तनी मुसकइलस, आ कहलस ई कइसन बुरबक वाला सवाल पुछतबानी. सब केहू आपन बाल बच्चा खातिर मरे ला हमहूं मरत बानी. साधू कहलस ठीक बा, तू तनी आपन बाल-बच्चा से जाके पूछत की ऊ तोहरा पाप में भागी बनीहन. ऊ कहलस का हे ना. फेर पूछे आपन घरे चल गइल. ओकर मेहरारू कहलस कि हमनी के पेट भरल राउर फरज बा. बाकिर रउआ पाप के भागी हमनी के काहे बनब जा. ई सुन के चोर के होश आ गइल. आ ऊ सुधर गइल. ठीक एही तरह का राज ठाकरे के ई कबो बुझा पाई कि जवन मराठा मानुष के ऊ बात करत बाड़े, ऊ पुरा हिंदुस्तान में विचरे के चाहत बा, समुन्द्र में तैरे के चाहत बा ना कि कुंआ के मेढक बन के रहे के चाहत बा. हमरा उमेद बा कि राज ठाकरे के ई बात जल्दी समझ में आ जाई. ना आई त उनका प कब यमराज मेहरबान हो जइहन केहूं नइखे जानत.
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Monday, October 19, 2009
भोजपुरी को सम्मान दिलाने के लिए जूटे भोजपुरिया
■ दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय भोजपुरी सम्मेलन में विश्वव्यापी आंदोलन छेडऩे का आह्वान
■ भोजपुरी एसोसियेशन ऑफ इंडिया व द संडे इंडियन के संयुक्त आयोजन में जुटे कई भोजपुरी संगठन
■ राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के कोने-कोने से आये भोजपुरियों ने की भाषा पर गहन चर्चा
■ लोकगायिकाओं के मधुर गीतों पर झूम उठे-भोजपुरिया
भोजपुरी भाषा को मान्यता दिलाने का आंदोलन जोर पकड़ता जा रहा है. देश के दर्जनों महत्वपूर्ण भोजपुरी संगठनों ने मिलकर इस आंदोलन को विश्व भर में फैलाने का आह्वान किया और इसके लिए जल्दी ही बाकायदा एक एक्शन प्लान सामने लाने की घोषणा की. यह घोषणा दिल्ली में हुए एक विशेष भोजपुरी सम्मेलन में की गयी. यह कोई आम सम्मेलन या कार्यक्रम नहीं वरन एक ऐसा अनूठा प्रयोग था, जिसमें भोजपुरिया लोगों के प्रति लोगों की धारणा ही बदल देने का माद्दा था. राजधानी दिल्ली में हुए पहले राष्ट्रीय भोजपुरी सम्मेलन में आये लोगों में ज्यादातर बुद्धिजीवी, लेखक, साहित्यकार, पत्रकार और अन्य पेशों से जुड़े लोग मौजूद थे. भोजपुरी एसोसियेशन ऑफ इंडिया ने इस सम्मेलन का आयोजन भोजपुरी में दुनिया की एकमात्र नियमित समाचार पत्रिका द संडे इंडियन के साथ मिल कर किया था. वैसे यह पत्रिका 14 भारतीय भाषाओं में प्रकाशित होती है.
सम्मेलन का उद्घघाटन करते हुए सात राज्यों में राज्यपाल रह कर इतिहास बनाने वाले श्री भीष्म नारायण सिंह ने कहा कि भोजपुरी की माटी में विद्वता है, शक्ति है, प्रेरणा है, जो हमें हमेशा एक-दूसरे से न केवल जोड़े रखती है बल्कि भाईचारे का संदेश भी देती है. यहां तक कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी भोजपुरी भाषा को चुना था. श्री सिंह दिल्ली में राष्ट्रीय भोजपुरी सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. 11 अक्तूबर को लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 108वीं जयंती पर राजघाट स्थित गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के सत्याग्रह मंडप में भोजपुरी भाषियों के इस सम्मेलन में कई प्रस्ताव पारित किये गये तथा इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए विश्वव्यापी आंदोलन छेडऩे की प्रतिज्ञा की गयी. श्री सिंह ने मॉरीशस का उदाहरण देते हुए कहा कि दुख की बात यह है कि दूसरे देश में भोजपुरी को आधिकारिक भाषा की मान्यता मिल चुकी है, लेकिन अपने देश में ही यह भाषा आज भी अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रही है.
सम्मेलन में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राज्य में विकास की नयी गंगा बहाने तथा बिहार को जंगल राज की बदनाम छवि से उबारने के लिए लोकनायक स्मृति सम्मान दिया गया. साथ ही पूर्व राज्यपाल एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता भीष्म नारायण सिंह को डा. राजेन्द्र प्रसाद स्मृति सम्मान वयोवृद्ध भोजपुरी साहित्यकार तथा दैनिक आज के संपादक रहे गिरिजा शंकर राय 'गिरिजेश ने प्रदान किया.
इस मौके पर सहारा इंडिया परिवार के चेयरमैन 'सहाराश्रीÓ श्री सुब्रत राय 'सहाराÓ को उत्तर प्रदेश और बिहार के भोजपुरी इलाकों के लोगों को सहारा परिवार में सर्वाधिक रोजगार देने हेतु महात्मा गांधी स्मृति सम्मान दिया गया तो भोजपुरी में दुनिया की पहली नियमित समाचार पत्रिका का प्रकाशन कर इतिहास रच देने वाले प्रसिद्ध मैनेजमेंट गुरु व प्लानमैन मीडिया समूह के प्रधान संपादक प्रो. अरिंदम चौधरी को संत कबीर स्मृति सम्मान से नवाजा गया. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से यह सम्मान दिल्ली में बिहार सरकार के डिप्टी रेजिडेंट कमिश्नर कारू राम ने तथा सहाराश्री की ओर से यह सम्मान 'सहारा टाइमÓ के संपादक उदय सिन्हा ने ग्रहण किया. इस अवसर पर द संडे इंडियन, भोजपुरी की सफलता से उत्साहित प्रो.अरिंदम चौधरी ने कहा कि भोजपुरी पत्रिका शुरु करना मेरे लिए एक चुनौती थी लेकिन अब मैं इसकी सफलता से बहुत खुश हूं.
सम्मेलन में उदय सिन्हा ने सहाराश्री के संदेश को पढक़र सुनाया. अपने संदेश में सहाराश्री ने कहा कि आधुनिक हिन्दी के उत्थान में अन्य भाषा एवं बोलियों के साथ-साथ मैथिली, मगही, अवधी और ब्रजभाषा का ही नहीं बल्कि भोजपुरी का भी महती योगदान है. विस्तार और व्यापकता की दृष्टि से भोजपुरी अग्रगण्य और सबसे अधिक उदार भाषा है. इसके उच्चारण में जो मिठास और माधुर्य है, वह हिन्दी की अन्य किसी भी भाषा-बोली में नहीं है. पहली बार राजधानी में आयोजित इस तरह के भोजपुरी सम्मेलन में इस भाषा की दशा-दिशा पर गहन चर्चा हुई.
इंडिया बुल्स के संस्थापक सदस्य रहे और भोजपुरी में उम्दा फिल्म बनाने वाले श्री कवि कुमार को भोजपुरी भूषण सम्मान दिया गया तो उन्होंने वादा किया कि भोजपुरी फिल्मों पर लगे अश्लीलता के आरोपों को धोने के लिए वे आगे भी प्रयास करते रहेंगे. भोजपुरी की एकमात्र ट्रेड मैगजीन भोजपुरी सिटी के मुख्य संरक्षक तथा फिल्म निर्माता श्री किशन खदरिया, पखावज वादक श्री दुर्गा प्रसाद मजूमदार व ऊर्जा वैज्ञानिक डॉ. अनिल सिंह को भोजपुरी भूषण सम्मान दिया गया.इनके अलावा वरिष्ठ भाजपा नेता कलराज मिश्र तथा मुंबई से कांग्रेस सांसद तथा भोजपुरी नेता संजय निरूपम को कुंवर सिंह स्मृति सम्मान दिया गया. सम्मेलन के मुख्य राष्ट्रीय संयोजक उदय सिन्हा ने भोजपुरी राष्ट्रीयता को बढ़ावा देने पर जोर दिया. इस सम्मेलन के सूत्रधार भोजपुरी एसोसिएशन आफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक (एशिया) व द संडे इंडियन के कार्यकारी संपादक (हिंदी व भोजपुरी) ओंकारेश्वर पांडेय ने कहा कि इस सम्मेलन में देश भर के भोजपुरिया लोगों की मौजूदगी ने स्पष्ट कर दिया है कि भोजपुरी की अब उपेक्षा नहीं की जा सकती.
सम्मेलन के पहले सत्र में 'भोजपुरी : राष्ट्रीयता का सवालÓ विषयक एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया था. संगोष्ठी में विषय प्रवर्तन करते हुए एसोसियेशन के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष शैलेष मिश्र ने देश और दुनिया में भोजपुरी की दशा-दिशा पर प्रकाश डालते हुए इसकी स्थिति में सुधार के लिए व्यापक आंदेलन छेडऩे पर बल दिया. मुख्य वक्ता डॉ रमाशंकर श्रीवास्तव तथा अन्य वक्ताओं ने भोजपुरी को मान्यता नहीं मिलने पर क्षोभ व्यक्त करते हुए भोजपुरी क्षेत्र के सांसदों की कमजोरी को रेखांकित किया.
भोजपुरी एसोसियेशन ऑफ इंडिया तथा द संडे इंडियन के इस संयुक्त आयोजन में वक्ताओं ने भोजपुरी की सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक ताकत और अब फिल्म व मीडिया के क्षेत्र में हो रही प्रगति का उल्लेेख करते हुए भाषा को मान्यता नहीं देने के लिए केन्द्र सरकार के रवैये की आलोचना की और कहा कि भोजपुरी संगठन भोजपुरी को उसका हक दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास करते रहें. इस मौके पर भोजपुरी समाज के अध्यक्ष अजीत दूबे ने कहा कि भोजपुरी भाषा आज किसी पहचान की मोहताज नहीं. आज भोजपुरी फिल्में जिस तेजी से व्यवसायिक रूप में उभरी हैं, वह अपने आप में शुभ संकेत है. लेकिन मल्टीपल एक्स कैपिटल लिमिटेड के प्रमुख तथा भोजपुरी में बेहद साफ सुथरी और उम्दा फिल्म बनाने वाले कवि कुमार ने भोजपुरी फिल्मों के स्तर पर चिंता जताते हुए कहा कि कहने को तो भोजपुरी में 450 फिल्में बन चुकी हैं, पर उनमें कितनी स्तरीय हैं और कौन सी फिल्म समारोह में जाने लायक. संगोष्ठी में बीएचयू के प्रो. सदानंद शाही, वीर कुंअर सिंह विवि के प्रो. रणविजय कुमार, आईसीसीआर के श्री अजय गुप्ता, आरा के वरिष्ठ साहित्यकार चौधरी कन्हैया प्रसाद, वीर कुंअर सिंह फाउंडेशन के अध्यक्ष निर्मल सिंह, पूर्वांचल गण परिषद के अध्य़क्ष निर्मल पाठक, इंद्रप्रस्थ भोजपुरी परिषद के संतोष पटेल आदि वक्ताओं ने विचार रखे.
इस मौके पर पद्मश्री शारदा सिन्हा ने भोजपुरी भाषा को अपनी कर्म भाषा करार देते हुए अपनी गायिकी से उपस्थित लोगों का मनोरंजन किया. लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने सुर छेड़ा तो दर्शक भाव विभोर हो उठे, मगर प्यासे रह गये, उन्हें जल्दी जाना था. मालिनी नेे कहा कि उन्हें इस भाषा से इतना प्यार है कि वे अगली बार भोजपुरी माटी में जरूर जनम लेंगी. कार्यक्रम में 18 भाषाओं में गाने वाली जानी मानी लोकगायिका और महुआ टीवी पर चल रहे सुपरहिट मॉर्निंग शो बिहाने-बिहाने की भौजी विजया भारती ने धमाकेदार प्रस्तुति देकर दर्शकों को थिरकने पर मजबूर कर दिया. विजया ने भोजपुरी लोकगीतों को अश्लीलता से दूर रखने पर जोर दिया. सम्मेलन में गोरखपुर से भोजपुरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष बीपी त्रिपाठी आये थे.
इस मौके पर प्रो. शत्रुघ्न प्रसाद को इग्नू में भोजपुरी पाठ्यक्रम को शुरूकरने हेतु सम्मानित किया गया.भोजपुरी का विकास व इसके प्रचार-प्रसार के लिए बाबू जगजीवन राम स्मृति सम्मान से भारत में मॉरीशस सरकार के उच्चायुक्त मुखेश्वर चून्नी को, पुरबिया टीवी चैनल हमार के चेयरमैन व पूर्व केंद्रीय मंत्री मतंग सिंह को वीर कुंवर सिंह सम्मान, भोजपुरी टीवी चैनल महुआ के चेयरमैन पीके तिवारी, आजाद टीवी चैनल के हेड अंबिका नंद सहाय तथा भोजपुरी साहित्यिक पत्रिका पाती के संपादक अशोक द्विवेदी को भिखारी ठाकुर स्मृति सम्मान प्रदान किया गया. भोजपुरी भूषण सम्मान से पद्मश्री शारदा सिन्हा व भोजपुरी फिल्मों के सुपरिचित अभिनेता कुणाल सिंह व लोकगायिका मालिनी अवस्थी को जबकि भोजपुरीश्री सम्मान गायिका अनामिका सिंह, जुड़वां गायक बंधु नंदन-चंंदन, और महुआ टीवी के प्रसिद्ध नवोदित एंकर प्रियेश सिन्हा को दिया गया. भोजपुरी सिने अभिनेत्री रानी चटर्जी, भोजपुरी में सीरियल बनाने वाले अमित कुमार, बंधुआ बाल मजदूरों के लिए काम करने वाले बचपन बचाओ आंदोलन के राष्ट्रीय सचिव राकेश सेंगर और दिल्ली में भोजपुरी संस्कृति को बढ़ावा देने वाले कुलजीत सिंह चहल को भोजपुरीश्री सम्मान दिया गया तो भोजपुरी कीर्ति सम्मान से अजीत दूबे, अशोक श्रीवास्तव, श्रीकांत सिंह यादव, शिवाजी सिंह, निर्मल पाठक, अश्वनी कुमार सिंह (बिहारी खबर के प्रकाशक), संतोष पटेल, निर्मल सिंह को दिल्ली में भोजपुरी को बढ़ावा देने के लिए दिया गया. यह शायद पहला मौका था जब किसी भोजपुरी मंच पर एक साथ देश और दुनिया में भोजपुरी भाषा और संगीत को बढ़ाने में खास भूमिका निभाने वाली सामाजिक संस्थाओं के अलावा सरकारी संस्थाओं को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया. भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के महानिदेशक श्री वीरेन्द्र गुप्ता, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के उप कुलपति प्रो. डॉ. डीपी सिंह, मैथिली-भोजपुरी एकेडमी के सचिव रवीन्द्र नाथ श्रीवास्तव परिचय दास, वीर कुवंर सिंह विवि आरा के प्रो. डॉ. रामपाल सिंह, उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, इलाहाबाद के निदेशक आनंद वर्धन शुक्ला को भोजपुरी कीर्ति सम्मान प्रदान किया गया तो सभागार तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंजता रहा. श्री दिव्य ज्योति जागृति संस्थान दिल्ली के स्वामी विशालानंद को भोजपुरी मित्र सम्मान और गोरखपुर से आये दैनिक आज के वयोवृद्ध पूर्व संपादक गिरिजा शंकर राय 'गिरिजेशÓ एवं रवीन्द्र श्रीवास्तव जुगानी भाई समेत अरविन्द विद्रोही (जमशेदपुर), डॉ. आर के दूबे (बक्सर), विश्वनाथ शर्मा (छपरा), बृज मोहन प्रसाद अनाड़ी (बलिया), डॉ. जनार्दन सिंह (बलिया), विशुद्धानंद (पटना), डॉ. भगवती प्रसाद द्विवेदी(पटना), सतीश कुमार सिन्हा (पटना), को भोजपुरी रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया. यह सम्मान प्लानमैन मीडिया समूह के प्रधान संपादक प्रो. अरिन्दम चौधरी, मल्टीपल एक्स के प्रमुख कवि कुमार, अमेरिका के डलास से आये भोजपुरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष शैलेश मिश्रा और पद्मश्री शारदा सिन्हा, मालिनी अवस्थी, विजया भारती, अभिनेत्री रानी चटर्जी आदि ने प्रदान किए.
कार्यक्रम के अंतिम सत्र में भोजपुरी की लोकगायिका पद्मश्री शारदा सिन्हा, विजया भारती, मालिनी अवस्थी, अनामिका व टीवी कलाकार नंदन-चंदन के साथ एंकर प्रियेश सिन्हा ने शानदार कार्यक्रम पेश किये. भोजपुरी फिल्मों की जानी मानी अभिनेत्री रानी चटर्जी ने अपनी अदाकारी से मन मोह लिया. कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से भारी संख्या में आये भोजपुरिया लोग शामिल हुए. राजधानी में आयोजित भोजपुरी का यह अनूठा कार्यक्रम था, जिसमें सब कुछ बेहद कल्पनाशील, शालीन और उच्च स्तरीय था. सम्मेलन में आये लोग भोजपुरी के 'इतिहास से वर्तमान तकÓ की झलक दिखाती शानदार प्रदर्शनी देखकर दंग रह गये. प्रदर्शनी का उद्घघाटन प्लानमैन मीडिया के प्रधान संपादक प्रो. अरिंदम चौधरी ने किया. इसमें भोजपुरी के पुरोधा व्यक्तियों की तस्वीरें लगायी गयी थी, जिनका रेखांकन सुरेश पांडुरंग ने किया. भोजपुरी के इतिहास पर एक डाक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन किया गया जिसका निर्देशन एडिटवर्क के डायरेक्टर सचिन सिंह ने किया था और आलेख व आवाज दसंइं (भोजपुरी) के मज्कूर आलम की थी. कार्यक्रम को सफल बनाने में द संडे इंडियन के सदाशिव त्रिपाठी,श्रीराजेश, निमेष शुक्ला, मज्कूर आलम, आशुतोष कुमार सिंह, विकास कुमार और अभिषेक कुमार के अलावा सीए प्रणव कुमार और अधिवक्ता प्रताप शंकर की दिन रात की मेहनत थी, और इन सबमें सबसे खास भूमिका दसंइं के अनिल पांडेय ने निभायी. भोजपुरिया लोगों को अपनी माटी के स्वाद वाला लिट्टी-चोखा भी खूब भाया. जी टीवी उत्तर प्रदेश तथा हमार टीवी इस सम्मेलन के टीवी पार्टनर तथा दैनिक राष्ट्रीय सहारा प्रिंट पार्टनर था. सम्मेलन में भोजपुरी एसोसियेशन को दुनिया के भोजपुरी संगठनों का प्रतिनिधि संगठन बनाने पर सहमति हुई और भोजपुरी भाषा को मान्यता दिलाने से लेकर भोजपुरी संस्कृति को बढ़ावा देने, भोजपुरी को रोजगार की भाषा बनाने तथा भोजपुरी भाषी इलाकों में आर्थिक पिछड़ापन दूर करने हेतु महात्मा गांधी की तर्ज पर अहिंसक सत्याग्रह तथा लोकनायक जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति की तर्ज पर व्यापक आंदोलन छेडऩे का आह्वान
किया गया.
Friday, October 9, 2009
राष्ट्रीय भोजपुरी सम्मेलन की तैयारी पूरी
लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 108वीं जयंती के अवसर पर 11 अक्टूबर 2009 को दोपहर 2.30 से भोजपुरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया और समाचार पत्रिका द संडे इंडियन के भोजपुरी संस्करण की ओर से गांधी दर्शन, राजघाट, नई दिल्ली में राष्ट्रीय भोजपुरी सम्मेलन का आयोजन किया गया है. सम्मेलन में देश विदेश से करीब 500 भोजपुरी भाषी लोग हिस्सा लेंगे. सम्मेलन के दौरान भोजपुरी की विकास यात्रा पर अतीत से वर्तमान तक चित्र प्रदर्शनी व भोजपुरी भाषा-संस्कृति पर लघु फिल्म का प्रदर्शन किया जायेगा. साथ ही टीवी व फिल्म जगत के मशहूर कलाकारों द्वारा रंगारंग कार्यक्रम पेश किये जायेंगे.सम्मेलन में भोजपुरी भाषा संस्कृति के प्रचार प्रसार व विकास के लिए कार्य करने वाले विशिष्ठ व्यक्तियों व संस्थाओं को सम्मानित भी किया जायेगा। इस क्रम में भोजपुरी का पाट्यक्रम आरंभ करने के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, पहली बार भोजपुरी में पाठ्यक्रम शुरू करने व पीएचडी कराने के लिए वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, गांधीवादी दर्शन पर विशेष अध्ययन तथा गांधी के सत्याग्रह आंदोलन की उद्गम भूमि चंपारण में गांधी जी की प्राथमिक शिक्षा केंद्रों को फिर से गति दे कर शैक्षणिक माहौल पैदा करने के लिए गांधी स्मृति दर्शन समिति की निदेशक श्रीमती सविता सिंह, भोजपुरी के प्रचार-प्रसार के लिए भोजपुरी अकादमी के संस्थापक सचिव ॥, भोजपुरी भाषा की शिक्षा के प्रसार के लिए बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) को सम्मानित किया जायेगा. दूसरी ओर लोकसभा अध्यक्ष श्रीमती मीरा कुमार और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लोकनायक जयप्रकाश नारायण सम्मान, दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित को डॉ. राजेंद्र प्रसाद सम्मान, पूर्व राज्यपाल भीष्म नारायण सिंह, सांसद संजय निरुपम, सांसद प्रभू नाथ सिंह, सांसद महाबल मिश्रा, सांसद अनवर अली, सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री शत्रुघ्न सिन्हा, सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय तथा मॉरीशस के भारत में उच्चायुक्त को भी सम्मानित किया जायेगा. साथ ही दिल्ली तथा अन्य शहरों में भोजपुरियां संस्कृति और संस्कार को जीवंत बनाए रखने वाले संगठनों को भी पुरस्कृत किया जायेगा. भोजपुरी भोजपुरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार इस सम्मेलन का आयोजन भोजपुरी भाषा व्यापकता और देश निर्माण में उसकी भूमिका को विश्व फलक पर लाना है. इसके अलावा संविधान की आठवीं अनुसूची में इस भाषा को शामिल कराने के लिए प्रयास करना इस कार्यक्रम का उद्देश्य है. भोजपुरी भाषा, संस्कृति व कला के क्षेत्र में कार्य करने वालों को उनके अहम योगदान के लिए सम्मानित किया जायेगा. भोजपुरी की लोक गायिका पद्मश्री शारदा सिन्हा, भोजपुरी भाषी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए सहारा समूह के सहाराश्री, भोजपुरी में पहली बार नियमित समाचार पत्रिका द संडे इंडियन के प्रकाशन करने के लिए प्लानमैन मीडिया के अध्यक्ष व प्रधान संपादक अरिंदम चौधरी, भोजपुरी में पहिला टीवी चैनल शुरू करे खातिर महुआ चैनल के अध्यक्ष पीके तिवारी, हमार टीवी के जरिये पुरबिया भाषाओं का प्रचार प्रसार करने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री मतंग सिंह को सम्मानित किया जायेगा. विदेशों से आने वाले अतिथियों में भोजपुरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अमेरिका के अध्यक्ष शैलेस मिश्रा, हिंदू सेंटर न्यूयार्क के संस्थापक डॉ विजय कुमार मेहता सहित देश के विभिन्न राज्यों के कई भोजपुरी भाषी कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे.
विशेष जानकारी खातिर संपर्क करीं
आशुतोष कुमार सिंह-९८९१७९८६०९
सदाशिव त्रिपाठी-९८७१२७३१७१
नीमेश शुक्ला-९९५८२७१००५
Tuesday, October 6, 2009
11 अक्टूबर के दिल्ली में राष्ट्रीय भोजपुरी सम्मेलन
राउर
आशुतोष कुमार सिंह
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