Saturday, May 14, 2016

राहुल मलहोत्राः फिजिक्स से फाइनेंस तक

व्यवसाय के क्षेत्र में ऐसे विरले ही पेशेवर होते हैं जिन्हें भौतिकी के साथ वित्त में भी महारथ हासिल होती है। सौ वर्ष से अधिक समय पूर्व अलबर्ट आइंस्टाइन का इससे नाता रहा है। हालांकि आइंस्टाइन सापेक्षता की थ्योरी से अधिक प्रसिद्ध हैं, किन्तु उन्होंने ब्राउनियन मोशन की भी खोज की थी। बाद में स्टॉक बाजार की गतिविधियों को समझने के लिए एक मानक विधि बना। वस्तुतः यह कहानी यहीं समाप्त नहीं हो जाती है, वर्ष १९७० में, भौतिक विज्ञानी एवं अर्थशास्त्रियों के एक अन्य समूह ने ब्राउनियन मोशन के सिद्धांत को थ्योरी ऑफ हीट ट्रांसफर के साथ उपयोग किया जो कि महत्वपूर्ण वित्तीय उत्पाद डेरीवेटिव की सही मूल्य गणना हेतु किया जाता है। मुख्यतः डेरीवेटिव जोखिम प्रबंधन उत्पाद होते हैं जो लोगों को होने वाली हानि के प्रति उनके पोर्टफोलियों को सुनिश्चित करने हेतु लोगों को अनुमति देते हैं। इस कार्य हेतु अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार दिया गया। तब से ही, अमेरिका एवं यूरोप की शीर्ष यूनिवर्सिटी के भौतिकीविद वित्त के क्षेत्र में प्रायः कार्य करने हेतु अभिलाषी रहे हैं। लेकिन इसके लिए चयन प्रक्रिया काफी कठिन है। डॉ. राहुल मल्होत्रा ऐसे ही प्रतिष्ठित भौतिकविदों में एक हैं, जो इस समय एक निवेशक प्रबंधक हैं। राहुल मल्होत्रा मूलतः दिल्ली के रहने वाले हैं, जिन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा दिल्ली पब्लिक स्कूल से प्राप्त की है। पिता का स्थानांतरण कोलकाता में हो जाने के कारण वे कोलकाता चले गए। यह सर्वविदित है कि आआइटी की संयुक्त प्रवेश परीक्षा अत्यंत कठिन होती है। वह इस परीक्षा में सफल प्रथम १०० में सम्मिलित हुए, लेकिन राहुल की आकांक्षा इससे अधिक की थी। अमेरिका के कैलिफोर्निया तकनीक संस्थान कैलटेम में भी उनका चयन हुआ। विज्ञान के क्षेत्र में, कैलटेम पूरे विश्व की श्रेष्ठ यूनिवर्सिटियों में से एक है। कैलटेम के बाद, राहुल पीएचडी की डिग्री प्राप्त करने के लिए ऑस्टिन स्थित टेक्सस यूनिवर्सिटी चले गए, जो भौतिकी का नामचीन संस्थान है। अणु भौतिकी से संबंधित इनके बहुत से पेपर प्रकाशित हुए हैं। विशेषकर कई लोगों के विचार में हिग्स बॉसन्स आज भी भौतिकी की एक अत्यधिक महत्वपूर्ण समस्या मानी जाती है। इस क्षेत्र में, हिग्स एंड बॉसन्स की खोज करने में उनकी कुछ पद्धतियां सर्वोत्तम समझी जाती है। जब राहुल पीएचडी के विद्यार्थी थे, तब उनकी रूचि रैंडम मैट्रिक्स के सिद्धांत के प्रति हो गई। इसे बाजार में स्टॉक एवं बांड्स आपस में किस प्रकार से संबंधित है से भी जोड़कर देखा जाता है। राहुल इस लिंकेज की संभावना को मान्यता को मान्यता दते हैं तथा इसका उपयोग अन्य प्रमुख वित्तीय कार्पोरेशंस हेतु नए उत्पादों तथा तकनीक के विकास में भी किया है। आज डॉ. मलहोत्रा न्यूयार्क की ग्लोबल निवेश फर्म में एक वरिष्ठ प्रोफेशनल हैं जो इसमें वाइस प्रेसीडेंट तथा निदेशक के पद पर कार्य कर चुके हैं। भौतिकी एवं गणितीय पद्धति का अपार ज्ञान होने के कारण वे प्रबंधन एवं अनुसंधान पोर्टफोलियों का कार्य कर रहे हैं। पूरे विश्व में उनके कार्यों के प्रभाव से अरबों डॉलर का निवेश किया जा रहा है। सेवानिवृत जन साधारण के हित में अधिक धनराशि का निवेश किया जा रहा है। उक्त ग्लोबल निवेश फर्म में कार्य करने से पहले, इन्होंने न्यूयार्क में नॉमूरा में काम किया है। मित्सुविशी यूएफजे और मिज्हो के साथ ही नॉमूरा जापान की शीर्ष वित्तीय फर्म है, लेकिन २००८ में बाजार में मंदी आ जाने के बाद नॉमूरा के कम जोखिम के साथ विश्व की एक मजबूत बैंक बनकर उभरी तत्पश्चात उसने विश्व में अपनी ताकतवर पहचान बनाई। राहुल ने ग्राहकों की जोखम भरी आवश्यकता और विश्लेषणात्मक क्षेत्र में किए गए प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन मॉडल्स में उन्होंने भौतिकी से रैंडम मैट्रिक्स सिद्धांत के सघन वाणिज्यक प्रयोगों का उपयोग कर पथ प्रदर्शन किया है। पिछले कई वर्षों से, इन मॉडल्स का उपयोग कर पूरे विश्व में अरबों डॉलरों का प्रबंध करने हेतु निवेशक फर्मों द्वारा उपयोग किया जा रहा है। उनका आदर्श वाक्य बिना दृढ़ता के प्रतिभा एक पैर के स्टूल के समान है।